कहानियां
छीपा कला के पुर्नजीवन की ‘आशा’
छीपा कला कपड़ों पर रंगकारी की एक ऐसी कला जो कई सौ सालों में फली-फूली आगे बढ़ी। तकरीबन पचास साल पहले मशीनों के बढ़ते प्रयोग से बेदम होती चली गई।…
पढ़ाई का सपना पूरा करने सास ने दी हिम्मत
अक्सर समाज में सास और बहू के रिश्ते को अलग नजर से देखा जाता है, लेकिन मेरे लिए मेरी सासू माँ एक सहारा बनकर सामने आईं। उन्होंने मुझे आगे बढ़ने…
कंचन की हरी उम्मीद
जयपुर जिले के किशनगढ़ रेनवाल की एक साधारण महिला कंचन ने अपनी बीमारी और कमजोरी को अपनी ताकत बना लिया। एक बीमारी के कठिन अनुभव ने उसे न सिर्फ खुद…
उजाले की शाला
सन् 1992 की बात है। झाबुआ जिला मध्यप्रदेश के छोटे से गांव “काली घाटी” में सूरज ढलते ही सब सन्नाटा हो जाता था। खेतों में दिनभर काम करने वाले बच्चों…
जब ग्राम सभा में पहुंचने लगी महिलाएं
यह कहानी झारखंड के हजारीबाग जिले के ग्राम पंचायत बच्छई की है, जहां कभी ग्राम सभा केवल औपचारिकता बनकर रह गई थी। महिलाओं की भागीदारी बेहद कम थी और उनके…
सूदखोरी का जाल तोड़ती ‘धोड़ी बैंक
मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचल झाबुआ जिले में एक समय ऐसा था जब सूरज ढलने के बाद केवल रात का अंधेरा ही नहीं, बल्कि कर्ज का काला साया भी गहरा जाता…
‘हाथ सिर्फ मेहंदी नहीं, अब ऑइल से भी सना करेंगे’
खंडवा जिले के खालवा ब्लॉक के छोटे से गांव सांवलीखेड़ा की रहने वाली गायत्री कासदे आज सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि हौसले, आत्मनिर्भरता और नारी सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी…
जैविक खेती की ओर दूदू के किसान
दूदू की यह कहानी केवल खेती के बदलाव की नहीं, बल्कि एक पूरे समाज के बदलते जीवन की कहानी है। रासायनिक खेती के कारण बिगड़ती जमीन, पलायन करते युवा और…
उसके न दिखने की खुशी और सुकून
आज फिर इतने सालों के बाद वैसा ही मंजर सामने आया। अपने ऑफिस जाने के लिए मैं रोज एक ही रास्ते से जाती हूं। आज मुझे रास्ते में एक चौराहे…
लडवारी की महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण
बुंदेलखंड अंचल के गांवों में जहां जनजीवन कर्ज के जाल में फंसा हुआ है वहीं लडवारी गांव की महिलाएं मंजरी फाउंडेशन से जुड़कर स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा…
माया का जीवन संघर्ष: एक संदेश
संघर्ष चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, सही सहयोग, अवसर और आत्मविश्वास से जीवन की दिशा बदली जा सकती है। परिवार की आर्थिक तंगी, बाल विवाह और फिर घरेलू…
विस्थापित बैगाओं को मिला मछली पालन का सहारा
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के दलदली बोदई गांव में पुस्तैनी रूप से रह रहे बैगा जनजातीय परिवारों को 26 साल पहले बालको-वेदांता कंपनी की बॉक्साइट खनन परियोजना के कारण विस्थापित…
