लैंगिक समानता के लिए “समावेशी क्रिकेट”

रितेश गौर
सिनर्जी संस्थान, हरदा, मध्यप्रदेश

हरदा शहर अभी पूरी तरह जागा भी नहीं था। हल्की ठंडी हवा चल रही थी और मैदान के एक कोने में 12 से 20 साल की कुछ स्कूल और कॉलेज की लड़कियां क्रिकेट की प्रैक्टिस कर रही थीं। उनके हाथों में बैट था, लेकिन उनके सामने केवल गेंद ही नहीं, बल्कि समाज की कई धारणाएं भी थीं।
यही वह पल था जहां से एक ऐसी कहानी शुरू हुई, जो आगे चलकर लैंगिक समानता के एक अभियान में बदल गई। इस कहानी के केंद्र में थीं हेमलता मींडराइ और तोशिबा कुरैशी, जो सिनर्जी संस्थान के चेंजमेकर्स प्रोग्राम से जुड़ी थीं। उनका सपना था लेदर बॉल से क्रिकेट खेलने का। उनका सवाल बहुत सीधा था, अगर क्रिकेट का मैदान लड़कों के लिए है, तो लड़कियों के लिए क्यों नहीं? उनके इसी विचार ने एक पहल की शुरुआत की। सिनर्जी संस्थान ने अपने कार्यक्षेत्र में लड़कियों का क्रिकेट टूर्नामेंट शुरू किया, ताकि लड़कियों को खेल के माध्यम से आत्मविश्वास और अवसर मिल सके।

लेकिन यह रास्ता आसान नहीं था। लड़कियों के सामने कई चुनौतियां थीं। खेलने के लिए उचित मैदान नहीं था, प्रॉपर ट्रेनिंग नहीं मिलती थी, और कई बार कपड़ों को लेकर टिप्पणियां भी सुननी पड़ती थीं। सबसे बड़ी चुनौती समाज की सोच थी। कई बार उन्हें यह सुनना पड़ता था “ये खेल लड़कों का है।” “तुम्हारा काम घर संभालना और चूल्हा जलाना है।” लेकिन इन सबके बावजूद लड़कियों ने हार नहीं मानी। उन्होंने मैदान के एक कोने को अपना बनाया और धीरे-धीरे उसे संभावनाओं के मैदान में बदल दिया। लगातार तीन वर्षों तक लड़कियों के क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित किए गए। इस दौरान एक महत्वपूर्ण समझ सामने आई कि अगर सच में लैंगिक समानता को मजबूत करना है, तो केवल लड़कियों को अवसर देना ही पर्याप्त नहीं है। लड़कों को भी इस बदलाव का हिस्सा बनाना जरूरी है।
इसी सोच के साथ 2024 में पहली बार जिला स्तरीय मिक्स्ड जेंडर क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित किया गया, जिसमें 50 टीमों ने भाग लिया। यह एक नया प्रयोग था, जहां टीम की कप्तान लड़कियां थीं और लड़के उनके साथ खेलते हुए सहयोग और सम्मान का नया उदाहरण पेश कर रहे थे।
इसके बाद यह पहल लगातार आगे बढ़ती गई। 2025 में यह पहल राज्य स्तरीय टूर्नामेंट बन गई, जिसमें मध्यप्रदेश के 4 जिलों की 102 टीमों के 1326 खिलाड़ी शामिल हुए। इसके बाद 2026 में समावेशी कप ने एक नया मुकाम हासिल किया। इस वर्ष आयोजित राज्य स्तरीय मिक्स्ड जेंडर समावेशी कप में मध्यप्रदेश के 8 जिलों की 184 टीमों के 2392 खिलाड़ियों ने भाग लिया। आज यह टूर्नामेंट केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है। यह लड़कियों के नेतृत्व, युवाओं की भागीदारी और समुदाय में समानता की सोच को मजबूत करने का मंच बन चुका है। इस पहल का असर अब समुदाय में दिखाई देने लगा है। आज लड़कियां टीम की कप्तान बनकर निर्णय ले रही हैं, और लड़के उनके नेतृत्व में खेलते हुए सम्मान और सहयोग की भावना सीख रहे हैं। कई लड़कियां जो पहले मैदान तक नहीं पहुंच पाती थीं, अब अपनी टीम का नेतृत्व कर रही हैं और अपनी पहचान बना रही हैं।

सबसे बड़ा बदलाव समुदाय में देखने को यह मिल रहा है जहां पहले लड़कियों के खेल में भाग लेने को लेकर संदेह था, वहीं अब परिवार और समुदाय उन्हें मैदान में खेलने और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। धीरे-धीरे यह समझ मजबूत हो रही है कि खेल, अवसर और सपने किसी एक लिंग तक सीमित नहीं होते। आज समावेशी कप केवल एक क्रिकेट टूर्नामेंट नहीं है। यह लैंगिक समानता, युवा नेतृत्व और सामाजिक बदलाव का एक मजबूत अभियान बन चुका है। छह साल पहले नेहरू स्टेडियम के एक छोटे से कोने में शुरू हुआ यह सपना आज मध्यप्रदेश के कई जिलों तक फैल चुका है और हर नए मैच, हर नई टीम और हर नए खिलाड़ी के साथ यह संदेश और मजबूत हो रहा है “हक है समान सभी का है मैदान।”
