रणनीतिक संचार

अंतर्मन का अवलोकन

मानव समाज के इतिहास में सामाजिक नागरिक संस्थाओं ने हमेशा एक समतामूलक, न्यायपरक और शोषण-मुक्त समाज के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाई है। राज्य और समाज व्यवस्था की विसंगतियों को बदलने का साहस सदैव इन संस्थाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दिखाया है।

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संचार और रणनीतिक संचार

संचार जहाँ संवाद की एक सहज सामान्य प्रक्रिया है वहीं रणनीतिक संचार किसी खास लक्ष्य की प्राप्ति के इरादे से किया जाता है। संचार एक निरंतर प्रक्रिया है जो एक व्यक्ति स्वयं से और दूसरे व्यक्ति/व्यक्तियों, संस्था/संस्थाओं आदि के साथ करता रहता है। संचार का अर्थ जहाँ अपनी बात, अपने विचारों को सामने वाले व्यक्ति/व्यक्तियों के समूह या किसी संस्था तक पहुँचाना वहीं किसी प्रभावशाली अथवा रणनीतिक संचार का अर्थ है एक ऐसी अवधारणा या प्रक्रिया को लक्षित समूह तक पहुँचाना जो किसी संस्था के दीर्घकालिक लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक हो तथा इसके लिए अग्रिम योजना तैयार करने का अवसर देती है।

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केस अध्ययन – सूत्र और स्वरूप

किसी केस अध्ययन का अर्थ है किसी व्यक्ति, व्यक्तियों के समूह या समुदाय का गहन अध्ययन। यह एक व्यवस्थित अध्ययन होता है जहां शोधकर्ता को यह स्पष्ट रूप से पता राहत है कि वह किस पर शोध कर रहा है तथा किसके लिए कर रहा है।

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परिचय का आदान-प्रदान

संवाद और संचार में परिचय की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। किसी भी व्यक्ति, समुदाय, समाज या संस्था के समक्ष हमारी तथ्यात्मक छवि हमारे परिचय के आधार पर ही बनती है।

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प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रभावी सहभागिता कैसे करें?

कोई भी कार्यक्रम तभी सफल होता है जब उसका संचालन करने वाले लोग अच्छी तरह प्रशिक्षित हों।
यही वजह है कि सामाजिक संस्थाओं के स्तर में निरंतर सुधार के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक है।

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मीडिया-संचारकों से जुड़ाव कैसे बनाएं?

सामाजिक संस्थाएं और मीडिया दोनों नागरिक मूल्यों के संरक्षण का काम करते हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि दोनों का एक दूसरे से जुड़ाव हो।

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सोशल मीडिया का इस्तेमाल क्यों और कैसे करें?

सामाजिक संस्थाएं जो काम करती हैं उनके बारे में सरकार, जनप्रतिनिधियों और व्यापक समाज के विभिन्न हिस्सों को जानकारी देने में सोशल मीडिया यहां भूमिका निभाता है।

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सुनना, संवाद करना और सीखना?

सामाजिक संस्थाओं ने समाज में बदलाव का जो स्वप्न देखा है, वह सबका साझा तभी बन सकता है जब समुदाय स्वयं उस परिवर्तन का नेतृत्व करे।

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समालोचनात्मक सोच और चिंतन को कैसे अपनाएं

समालोचनात्मक सोच एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से हम किसी विषय, स्थिति या सिद्धांत को लेकर अपने विचारों में स्पष्टता लाते हैं। समालोचनात्मक सोच एवं चिंतन तभी संभव है जब हम किसी दिये गये विषय, स्थिति या सिद्धांत के बारे में तथ्यानात्मक ढंग से विश्लेषण करें।

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प्रभावी कहानी कैसे लिखें?

सामाजिक संस्था या कार्यकर्ता के लिए कहानी केवल कहानी नहीं होती बल्कि वह ‘बदलाव की कहानी’ होती है। उसमें कुछ परिणाम और संदेश निहित होते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता के लिए कहानी का अर्थ है वास्तविक और जमीनी घटनाक्रम की रोचक प्रस्तुति। ऐसी कहानी के चार तत्व होते हैं। पहला विचार, दूसरा समुदाय एवं पात्र, तीसरा परिवर्तन की पहल और चौथा परिणाम अथवा निष्कर्ष। सामाजिक संस्था को कहानी इसलिए कहनी चाहिए ताकि उसकी बात और उसके द्वारा किए जा रहे कार्य किसी खास भौगोलिक इलाके में सिमट कर न रह जाएँ तथा व्यापक समाज से जुड़ सकें।

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