मई 2026

हीरा खदान के मजदूर अरविंद की पहल

बहुमूल्य रत्न हीरा के लिए ख्यात मप्र के पन्ना जिले के गरीब आदिवासी मजदूरों की स्थति बहुत ही चिंताजनक है। यहां दो वक्त की रोजी रोटी के लिए सिर पर जलाऊ लकड़ी का गट्ठर धोती महिलाओं से लेकर हीरा और पत्थर खदान में अपनी किस्मत खोजते, टीबी और सिलकोसिस से जूझते पलायन करने को बेबश मजदूरों का जीवन गरीबी और दुर्व्यवस्था की कहानी कहता है।

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मिट्टी से अपनी नई पहचान गढ़ रही हैं महिलाएं

महासमुंद शहर के वार्ड क्रमांक 26 में रहने वाली कुम्हार समाज की महिलाएं आज अपनी मेहनत, कला और एकजुटता के दम पर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। कभी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाली इन कुम्हार समाज की महिलाओं ने खोते जा रहे अपने परंपरागत पेशे को पुनर्जीवित किया है।

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खेल का नैरेटिव: क्या बिना पैसे, बड़े शहर और सुविधाओं के खिलाड़ी बनना संभव है?

भारतीय खेल जगत में लंबे समय से एक धारणा रही है कि बड़ा खिलाड़ी बनने के लिए बड़े शहर, महंगी अकादमियां, अत्याधुनिक सुविधाएं और आर्थिक रूप से मजबूत परिवार होना जरूरी है। यह नैरेटिव इतना मजबूत रहा है कि कई प्रतिभाशाली बच्चे मैदान तक पहुंचने से पहले ही अपने सपनों को छोड़ देते हैं। लेकिन भारत के अनेक खिलाड़ियों की कहानियां इस सोच को गलत साबित करती हैं।

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संचार और रणनीतिक संचार

संचार जहाँ संवाद की एक सहज सामान्य प्रक्रिया है वहीं रणनीतिक संचार किसी खास लक्ष्य की प्राप्ति के इरादे से किया जाता है। संचार एक निरंतर प्रक्रिया है जो एक व्यक्ति स्वयं से और दूसरे व्यक्ति/व्यक्तियों, संस्था/संस्थाओं आदि के साथ करता रहता है। संचार का अर्थ जहाँ अपनी बात, अपने विचारों को सामने वाले व्यक्ति/व्यक्तियों के समूह या किसी संस्था तक पहुँचाना वहीं किसी प्रभावशाली अथवा रणनीतिक संचार का अर्थ है एक ऐसी अवधारणा या प्रक्रिया को लक्षित समूह तक पहुँचाना जो किसी संस्था के दीर्घकालिक लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक हो तथा इसके लिए अग्रिम योजना तैयार करने का अवसर देती है।

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बाल स्वराज : बालमित्र दुनिया का एक सपना

बाल स्वराज यूं तो वाग्धारा संस्था द्वारा संचालित बच्चों के समूह का एक नाम है। इसके पीछे एक बालमित्र  दुनिया बनाने का वह व्यापक सपना है जहां हर बच्चे को उसका अधिकार मिल सके। जहां कम उम्र में लड़के-लड़कियों को ब्याहा न जाए उनसे उनके सपने, उनकी पढ़ाई उनका स्वास्थ्य न छीना जाये। बांसवाड़ा राजस्थान के आदिवासी अंचल में इसी दिशा में जारी है जागरूकता की एक सामुदायिक पहल। 

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‘संवादिनी’ से सशक्त हो रही हैं किशोरियां

संवादिनी प्रोजेक्ट के अंतर्गत एक और महत्वपूर्ण पहल थी,किशोरी सशक्तिकरण केंद्र (AGEC) और महिलाओं के लिए संकट हस्तक्षेप केंद्र की स्थापना। इन केंद्रों का उद्देश्य था कि किशोरियों और महिलाओं को एक ऐसा सुरक्षित स्थान मिले जहां वे सीख सकें, संवाद कर सकें और जरूरत पड़ने पर सहायता प्राप्त कर सकें।

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