उसके न दिखने की खुशी और सुकून
आज फिर इतने सालों के बाद वैसा ही मंजर सामने आया। अपने ऑफिस जाने के लिए मैं रोज एक ही रास्ते से जाती हूं। आज मुझे रास्ते में एक चौराहे पर एक महिला दिखी, उम्र लगभग 30 साल होगी, इससे पहले मैंने उसे वहां कभी नहीं देखा था। कुछ सूदबुदाई सी वो महिला रास्ते पर अजीब तरीके से बैठी थी। उसके पास एक गंदे कपड़ों का पोटला था और एक गंदा गद्दा, जिस पर वो बैठी थी। मैंने उसे मेरी चलती गाड़ी में से एक नजर से बस देखा था, और मैं वहां से गुजर गई। लेकिन उस एक नजर में ही मानो सब कुछ हो गया।
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