डिजिटल पाठ्यक्रम

विकास संवाद द्वारा सिविक आख्यान के तहत सामाजिक-नागरिक संस्थाओं के विभिन्न आयामों पर क्षमतावृद्धि कार्यक्रम के तहत यह कोर्स डिजाइन किए गए हैं। इनमें प्रभावी संचार, स्टोरीटेलिंग, आकल्पन, फंडरेजिंग के कोर्स शामिल हैं।

प्रभावी संचार एवं स्टोरी टेलिंग बेसिक
सामाजिक मुद्दों पर जनउद्बोधन
आकल्पन
फंडरेजिंग फॉर सीएसओज

संदर्भ

अपने फ़न में बेहतर होने के लिए संदर्भों को जानना—समझना बेहद आवश्यक है। सिविक आख्यान की पहल में कोशिश है आसान भाषा और आख्यानों के साथ संदर्भ सामग्री संजोने की। इस सेक्शन में आप ऐसी ही सामग्री को पाएंगे।

ट्रेनिंग

सिविक आख्यान के तहत स्टोरीटेलिंग के विभिन्न आयामों पर अब तक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लेखा जोखा। इस पहल से आप भी जुड़ सकते हैं अपने साथियों को जोड़ सकते हैं।

40

प्रशिक्षण

344

संस्थाएं

850

प्रतिभागी

प्रकाशन

स्टोरीटेलिंग के विविध आयामों पर निरंतर नए प्रकाशनों के साथ हम आपको कहानियां, नजरिया और संदर्भ देते हैं, जिनसे हम अपना काम और बेहतर बना सकते हैं। इस सेक्शन में आप यही जान—समझ सकते हैं।

सामाजिक नागरिक संस्थाएं मायने और बुनियादी दृष्टिकोण

भारत में समाज और व्यवस्थाओं को एक सार्थक रूप प्रदान करने में सामाजिक नागरिक संस्थाओं की रचनात्मक और प्रभावकारी भूमिका रही है। यह समय है जब संस्थाओं को अपने अस्तित्व की महत्ता समाज को महसूस करवाने की जरूरत है।

उम्मीद और पहल की कहानियाँ: भाग 1

भारत में सामाजिक और नागरिक संस्थाएं सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के समाधान में सक्रिय हैं, लेकिन व्यापक समाज से प्रभावी संवाद न होने के कारण उनकी नकारात्मक छवि पेश की जाती रही है। इस दूरी को मिटाने के लिए संस्थाओं को केवल अपने लाभार्थियों तक सीमित न रहकर रणनीतिक संचार अपनाने की…

मंथन

सभ्यता के विकास में, मूल्यों के बनने, बने रहने और बेहतर होते जाने और अंत्योदय के लक्ष्य के साथ सामाजिक—नागरिक संस्थाओं का अपना एक गौरवमयी इतिहास है। अनेक कारणों से संस्थाओं के आख्यान को बिगाड़ा गया है। इस ईकोसिस्टम में विचारों की यह अभिव्यक्ति ताकि हमारा नजरिया समृद्ध हो सके।

अपनी विज़िबिलिटी बढ़ाने का सोच रहे हैं, पहले यह पढ़ें

पिछले दिनों मुझे स्टोरी टेलिंग के एक सेशन में संस्थाओं की  विज़िबिलिटी पर बात करने का अवसर मिला। बातचीत अच्छी रही, जो कुछ कह पाया, वह यहां भी शेयर कर रहा हूं। आशा है आपको उपयोगी लगेगा।   राकेश कुमार मालवीय एक संस्था की डिजिटल विज़िबिलिटी उसकी वेबसाइट, सोशल मीडिया,…

सामाजिक क्षेत्र की इलाकाई मानसिकता और असुरक्षा

2005 की बात है। यूपीएससी के इम्तिहान में धूल चाटने के बाद जब मैं नए सिरे से जीवन में मायने ढूंढने की कोशिश कर रहा था।  तब मैंने उत्तराखंड में एक संस्था में काम करने की ठानी। संस्था वालों ने काफी वक़्त लगाया मेरी दरख्वास्त पर विचार करने के लिए।…

दृश्य-श्रृव्य: कहानी और नजरिया

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