कहानियां

बाल स्वराज : बालमित्र दुनिया का एक सपना

बाल स्वराज यूं तो वाग्धारा संस्था द्वारा संचालित बच्चों के समूह का एक नाम है। इसके पीछे एक बालमित्र  दुनिया बनाने का वह व्यापक सपना है जहां हर बच्चे को…

‘संवादिनी’ से सशक्त हो रही हैं किशोरियां

संवादिनी प्रोजेक्ट के अंतर्गत एक और महत्वपूर्ण पहल थी,किशोरी सशक्तिकरण केंद्र (AGEC) और महिलाओं के लिए संकट हस्तक्षेप केंद्र की स्थापना। इन केंद्रों का उद्देश्य था कि किशोरियों और महिलाओं…

आदिवासियों ने अपने खेतों के लिए मेहनत कर रास्ता बनाया

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में पोहरी से लगभग 15 किलोमीटर दूर एक छोटा सा गांव बसा है अहेरा मङखेड़ा। इस गांव में मुख्य रूप से आदिवासी समुदाय के लोग…

प्राकृतिक खेती जुड़ी है मानवीय मूल्यों से

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पूरी दुनिया में कृषि का स्वरूप तेजी से बदला। रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक और संकर बीज आधुनिक कृषि के आधार बन गए। खेती धीरे-धीरे प्रकृति से दूर…

लड़कियों के स्वास्थ्य को लगे पंख

यह कहानी किशोरी बालिका के स्वास्थ्य के लिए लड़ी गई जंग पर है। इसमें बालिका के स्वास्थ्य और पोषण संबंधी यात्रा पर ध्यान केंद्रित किया गया है। उनके जीवन में…

रेगिस्तान में पानी की स्मृति और हरियाली की वापसी

थार के रेगिस्तान में दोपहर का समय केवल गर्मी नहीं, बल्कि जीवन की कठिन परीक्षा जैसा होता है। हवा में धूल घुली रहती है, तापमान 45–50 डिग्री तक पहुंच जाता…

बदलाव की बयार कटोरी

राजस्थान के एक छोटे से गांव में, जहाँ समय मानो ठहर सा गया था। वहां की महिलाओं के लिए जीवन किसी संघर्ष से कम नहीं था। सदियों से चली आ…

हलमा से निकला समुदाय की समस्याओं का हल!

राजस्थान की अरावली पठार के बाँसवाड़ा जिले की तहसील घाटोल में बसा है पहाड़ी क्षेत्र वाला गांव मियासा। यहां रहने वाली जनजाति यहां की जैव-विविधता पर पूरी तरह निर्भर…
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