कहानियां

हीरा खदान के मजदूर अरविंद की पहल

बहुमूल्य रत्न हीरा के लिए ख्यात मप्र के पन्ना जिले के गरीब आदिवासी मजदूरों की स्थति बहुत ही चिंताजनक है। यहां दो वक्त की रोजी रोटी के लिए सिर पर जलाऊ लकड़ी का गट्ठर धोती महिलाओं से लेकर हीरा और पत्थर खदान में अपनी किस्मत खोजते, टीबी और सिलकोसिस से जूझते पलायन करने को बेबश मजदूरों का जीवन गरीबी और दुर्व्यवस्था की कहानी कहता है।

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मिट्टी से अपनी नई पहचान गढ़ रही हैं महिलाएं

महासमुंद शहर के वार्ड क्रमांक 26 में रहने वाली कुम्हार समाज की महिलाएं आज अपनी मेहनत, कला और एकजुटता के दम पर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। कभी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाली इन कुम्हार समाज की महिलाओं ने खोते जा रहे अपने परंपरागत पेशे को पुनर्जीवित किया है।

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बाल स्वराज : बालमित्र दुनिया का एक सपना

बाल स्वराज यूं तो वाग्धारा संस्था द्वारा संचालित बच्चों के समूह का एक नाम है। इसके पीछे एक बालमित्र  दुनिया बनाने का वह व्यापक सपना है जहां हर बच्चे को उसका अधिकार मिल सके। जहां कम उम्र में लड़के-लड़कियों को ब्याहा न जाए उनसे उनके सपने, उनकी पढ़ाई उनका स्वास्थ्य न छीना जाये। बांसवाड़ा राजस्थान के आदिवासी अंचल में इसी दिशा में जारी है जागरूकता की एक सामुदायिक पहल। 

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‘संवादिनी’ से सशक्त हो रही हैं किशोरियां

संवादिनी प्रोजेक्ट के अंतर्गत एक और महत्वपूर्ण पहल थी,किशोरी सशक्तिकरण केंद्र (AGEC) और महिलाओं के लिए संकट हस्तक्षेप केंद्र की स्थापना। इन केंद्रों का उद्देश्य था कि किशोरियों और महिलाओं को एक ऐसा सुरक्षित स्थान मिले जहां वे सीख सकें, संवाद कर सकें और जरूरत पड़ने पर सहायता प्राप्त कर सकें।

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आदिवासियों ने अपने खेतों के लिए मेहनत कर रास्ता बनाया

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में पोहरी से लगभग 15 किलोमीटर दूर एक छोटा सा गांव बसा है अहेरा मङखेड़ा। इस गांव में मुख्य रूप से आदिवासी समुदाय के लोग निवास करते हैं, जिनका जीवन खेती-किसानी और कड़ी मेहनत पर टिका है। लेकिन उनके सामने एक बहुत बड़ी समस्या खड़ी थी। उनके खेतों तक पहुंचने का रास्ता।

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बकरी चराने से बीएससी तक निशा की कहानी

कोटड़ी अजमेर नागौर और जयपुर की सीमा पर बसा एक गांव है। रुपनगढ़ से 19 किलोमीटर दूर बसे इस गांव का पानी खारा है, जिससे यहां पर खरीफ सीजन की केवल एक ही फसल वर्षा के पानी से हो पाती है। ज्यादातर लोग खारे पानी की सांभर झील पर मजदूरी करने जाते हैं। वहां नमक बनाने का काम किया जाता है।

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प्राकृतिक खेती जुड़ी है मानवीय मूल्यों से

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पूरी दुनिया में कृषि का स्वरूप तेजी से बदला। रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक और संकर बीज आधुनिक कृषि के आधार बन गए। खेती धीरे-धीरे प्रकृति से दूर होती चली गई और उद्योगों पर निर्भर हो गई।

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लड़कियों के स्वास्थ्य को लगे पंख

यह कहानी किशोरी बालिका के स्वास्थ्य के लिए लड़ी गई जंग पर है। इसमें बालिका के स्वास्थ्य और पोषण संबंधी यात्रा पर ध्यान केंद्रित किया गया है। उनके जीवन में घटित घटनाओं से परियोजना तरंगिणी के पहले और बाद की स्थिति को बताया गया है। इस कहानी में बताया गया है कि किस तरह से उनके जीवन में स्वास्थ्य में परिवर्तन आया।

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रेगिस्तान में पानी की स्मृति और हरियाली की वापसी

थार के रेगिस्तान में दोपहर का समय केवल गर्मी नहीं, बल्कि जीवन की कठिन परीक्षा जैसा होता है। हवा में धूल घुली रहती है, तापमान 45–50 डिग्री तक पहुंच जाता है और दूर-दूर तक फैली रेत के बीच छोटे-छोटे घर जीवन की जिद का प्रतीक बनकर खड़े दिखाई देते हैं।

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बदलाव की बयार कटोरी

राजस्थान के एक छोटे से गांव में, जहाँ समय मानो ठहर सा गया था। वहां की महिलाओं के लिए जीवन किसी संघर्ष से कम नहीं था। सदियों से चली आ रही परंपराओं और सामाजिक दबावों ने महिलाओं को घर की चारदीवारी में कैद कर रखा था। उनके सपनों और महत्वाकांक्षाओं को समाज की दकियानूसी सोच ने दबा दिया था।

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