सिविल सोसायटी – सत्यनिष्ठ आख्यान से दूरी क्यों?
संकट तब नहीं होता है, जब फंदा कसा जा रहा होता है और बेड़ियाँ डाली जा रही होती हैं और समाज से दूरियां बढ़ रही होती हैं। संकट तब होता है जब फंदे और बेड़ियों में स्वयं को संयोजित या बैठ-बिठाव किया जाने लगता है, उस व्यवस्था से समन्वय स्थापित किया जाने लगता है। फिर उस फंदे कसने वाली, बेड़ियाँ डालने वाली और समाज से दूरियां बढ़ाने के लिए मजबूर करने वाली व्यवस्था से समन्वय और मान्यता की अपेक्षा की जाने लगती है और स्वतः स्फूर्त पहल की जाने लगती है।
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