मार्च 2026

लड़कियों के स्वास्थ्य को लगे पंख

यह कहानी किशोरी बालिका के स्वास्थ्य के लिए लड़ी गई जंग पर है। इसमें बालिका के स्वास्थ्य और पोषण संबंधी यात्रा पर ध्यान केंद्रित किया गया है। उनके जीवन में घटित घटनाओं से परियोजना तरंगिणी के पहले और बाद की स्थिति को बताया गया है। इस कहानी में बताया गया है कि किस तरह से उनके जीवन में स्वास्थ्य में परिवर्तन आया।

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रेगिस्तान में पानी की स्मृति और हरियाली की वापसी

थार के रेगिस्तान में दोपहर का समय केवल गर्मी नहीं, बल्कि जीवन की कठिन परीक्षा जैसा होता है। हवा में धूल घुली रहती है, तापमान 45–50 डिग्री तक पहुंच जाता है और दूर-दूर तक फैली रेत के बीच छोटे-छोटे घर जीवन की जिद का प्रतीक बनकर खड़े दिखाई देते हैं।

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बदलाव की बयार कटोरी

राजस्थान के एक छोटे से गांव में, जहाँ समय मानो ठहर सा गया था। वहां की महिलाओं के लिए जीवन किसी संघर्ष से कम नहीं था। सदियों से चली आ रही परंपराओं और सामाजिक दबावों ने महिलाओं को घर की चारदीवारी में कैद कर रखा था। उनके सपनों और महत्वाकांक्षाओं को समाज की दकियानूसी सोच ने दबा दिया था।

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सामाजिक नागरिक संस्थाएं जन मुद्दों पर रचनात्मक आख्यान कैसे बना सकती हैं?

व्यापक अनुभवों के बाद अब कुछ साफ़-साफ़ दिखाई दे रहा है। महात्मा गांधी ने एक बात कही थी। केवल साध्य (लक्ष्य) ही नहीं साधन भी महत्वपूर्ण है। वह लक्ष्य किस साधन (तरीके, संसाधनों और भाव) से प्राप्त किया जा रहा है, यह ध्यान रखना और समीक्षा करना जरूरी होता है। अगर हमारा लक्ष्य लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना करना है तो यह लक्ष्य दबाव डाल, शोषण और झूठ कहकर हासिल नहीं किया जा सकता है।

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