रणनीतिक संचार संदर्भ सामग्री – भाग 8

समालोचनात्मक सोच और चिंतन को कैसे अपनाएं

समालोचनात्मक सोच एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से हम किसी विषय, स्थिति या सिद्धांत को लेकर अपने विचारों में स्पष्टता लाते हैं।

समालोचनात्मक सोच एवं चिंतन तभी संभव है जब हम किसी दिये गये विषय, स्थिति या सिद्धांत के बारे में तथ्यात्मक ढंग से विश्लेषण करें। सामान्य सोच और समालोचनात्मक सोच में एक प्रमुख अंतर यह है कि सामान्य सोच जहां किसी घटना को जस का तस देखती है वहीं समालोचनात्मक सोच उसके मूल में जाकर घटित होने के कारण, प्रक्रिया और उसके व्यापक प्रभाव तक पर विचार करती है।

समालोचनात्मक सोच मुख्य रूप से छ: ककारों पर निर्भर रहती है: क्या, कौन, कब, कहां, कैसे और क्यों? किसी घटना के बारे में अगर ये सवाल बार-बार और गंभीरता से पूछे जाएंगे तो हम समालोचनात्मक सोच आधारित निष्कर्ष हासिल कर सकेंगे। समालोचनात्मक सोच हासिल करने की प्रक्रिया का एक प्रमुख हिस्सा यह है कि हम निरंतर जानकारियां जुटाते रहें, सीखते रहें, स्वयं से प्रश्न करते रहें, स्वयं का मूल्यांकन करते रहें और प्रशिक्षण लेते रहें। समालोचनात्मक सोच से जुड़े कई लाभ हैं: यह हमें विश्लेषणपरक बनाती है, इससे हमारी दृष्टि साफ होती है और मानसिक खुलापन आता है, संस्था में प्रक्रियागत मजबूती आती है और हम समाधान की ओर बढ़ते हैं।

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