सुनना और श्रवण करना – जानिए फर्क क्या है?

किसी भी ध्वनि तरंगों का हमारे कानों में पहुँचना सुनने की श्रेणी में आता है, लेकिन जब हम किसी बात को ध्यान लगाकर पूरी एकाग्रता से सुनते हैं तो वह श्रवण कहलाता है। श्रवण की प्रक्रिया में हमारा मस्तिष्क बात को पूरा सुनता है और सुनने के दौरान कहीं और भटकता नहीं है और फिर सुनी हुई बात का विश्लेषण करता है।

जब गौर से विश्लेषण करेंगे तब आप खुद यह जान पाएंगे किआप केवल सुनते हैं या ध्यानपूर्वक सुनते हैं।

जब हम समूह में या दो व्यक्तियों में संचार/संवाद की बात करते हैं, तब केवल सुनना ही महत्वपूर्ण नहीं होता है, पूर्वाग्रह के बिना और ध्यान से सुनना, बात के अर्थ और उसके भावों को समझना भी हमारे सुनने में शामिल होना चाहिए। श्रवण करने में हम कहने वाले व्यक्ति के प्रति अपना सम्पूर्ण आदर भाव रखते हैं।

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