
सामाजिक संस्था या कार्यकर्ता के लिए कहानी केवल कहानी नहीं होती बल्कि वह ‘बदलाव की कहानी’ होती है।
उसमें कुछ परिणाम और संदेश निहित होते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता के लिए कहानी का अर्थ है वास्तविक और जमीनी घटनाक्रम की रोचक प्रस्तुति। ऐसी कहानी के चार तत्व होते हैं। पहला विचार, दूसरा समुदाय एवं पात्र, तीसरा परिवर्तन की पहल और चौथा परिणाम अथवा निष्कर्ष। सामाजिक संस्था को कहानी इसलिए कहनी चाहिए ताकि उसकी बात और उसके द्वारा किए जा रहे कार्य किसी खास भौगोलिक इलाके में सिमट कर न रह जाएँ तथा व्यापक समाज से जुड़ सकें।
किसी सामाजिक संस्था को कहानी लिखते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। कम के दौरान उसके सामने क्या समस्या आई? उसका किस प्रकार सामना किया गया? इस दौरान कौन से तथ्य और आंकड़े उभरकर आए? आंकड़ों और तथ्यों का किस प्रकार इस्तेमाल किया गया?
एक अच्छी कहानी लिखने के कुछ बुनियादी नियम हैं: अपने आसपास की घटनाओं पर सजग दृष्टि रखें, कहानी के लिए एक बेहतर विषय चुने, कहानी में संदेश उभरकर आना चाहिए, शीर्षक एवं शुरुआत रोचक होनी चाहिए जो खुद को पढे जाने के लिए प्रेरित करे, कहानी को बार-बार पढ़कर आवश्यक सम्पादन करना चाहिए जिससे कथ्य में कसावट हो।
