चौका तकनीक

गोपालपुरा गांव के चारागाह की दास्तान

कभी-कभी कुछ कहानियां छोटी होती हैं, लेकिन वो कम शब्दों में भी अपनी पूरी दास्तां बया कर देती है। ऐसी ही एक छोटी कहानी राजस्थान के जयपुर जिले के पास खारे पानी की सांभरलेक के किनारे बसे गांव गोपालपुरा की है। इस गांव का गौचर बंजर हो चुका है और शेष गौचर निजी स्वार्थों के कारण अतिक्रमण की भेंट चढ़ गया।

गांव के ही छोटे पशुपालक जस्सुराम बावरिया ने बताया कि पहले हमारे गांव में हर परिवार के पास 5 से 10 गायें होती थीं। ये भी हमारे गौचर मे ही चरती थीं। लेकिन धीरे-धीरे हमारी शामलात भूमि-गौचर पर अतिक्रमण के बाद कुछ ही लोगो के पास पशुधन बचा था। जस्सुराम के पास 5 भेड़ व 20 बकरियाँ हैं। वहीं खेती के लिए केवल 1 बीघा बंजर जमीन बची है। अब अपने घर परिवार में कमाई करने वाला वही अकेला व्यक्ति है। वह मजदूरी भी नहीं करने जा सकता। उसका मानना है कि उजड़ चुके गौचर के अभाव में बडे़ दुधारू पशु नही रख सकता। क्योंकि उन पशुओं के लिए चराई की जगह गौचर अब वीरान हो चुकी है। वह कहता है, मै अकेला कुछ भी नही कर सकता। अब तो सबको साथ मिलकर चलने की जरूरत है।

ऐसे हालात में एक समय आया जब गोपालपुरा गांव में एक सामाजिक संस्था ग्राम विकास नवयुवक मण्डल लापोड़िया आई। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर इस वीरान पडे़ चारागाह का पुनः विकास करेंगे। इसी प्रक्रिया में गांव के प्रमुख लोगों से सम्पर्क किया गया। जब जस्सुराम को इस बात का पता चला तो उसको उम्मीद की एक नई किरण नजर आई। जस्सुराम ने लोगों को गांव की चौपाल पर इकट्ठा करने में मदद की। इस दौरान गांव के कुछ अतिक्रमणकारियों ने इसका विरोध किया, लेकिन गांव के ही अधिकांश लोगों ने अपने चारागाह को फिर से जीवित करने के लिए सहमति दी। संस्था के कार्यकर्ता ने बताया कि लंबे समय के अनुभव के मुताबिक चारागाह विकास व जल संरक्षण के लिए चौका तकनीक से आपके चारागाह को ठीक किया जा सकता है। गौचर में चौका तकनीक से नमी बढे़गी, पानी का स्तर ऊपर आयेगा। मिट्टी का कटाव रुकेगा और पूरे साल भर पशुओं को चरने के लिए पर्याप्त चारा मिलेगा।

गोपालपुरा गांव के लोगों ने चौका प्रणाली का नाम ही पहली बार सुना था। उनको यह अजीब सा लगा। लेागों में भरोसा बनाने के लिए संस्था ने तय किया कि गांव के 10-12 लोगों का एक्सपोजर विजिट कराया जायेगा। इसके लिए उन्हें राजस्थान के टोंक जिले के मालपुरा ब्लॉक के पास बालापुरा गांव ले जाया जायेगा। इस पर लोगों ने एक्सपोजर विजिट के लिए सहमति दे दी और 10-12 लोगों के नाम भी तय कर दिये।

12 मार्च 2022 को इन सभी को बालापुरा चारागाह का विजिट करवाया गया और चारागाह विकास के लिए अपनायी गयी चौका तकनीक को दिखाया गया। साथ ही गांव की चारागाह विकास समिति से चर्चा भी करवायी गयी। इसके बाद लोगों को यकीन हो गया कि हमारे गोचर का भी इस चौका तकनीक से विकास सम्भव है।

बालापुरा गांव की विजिट के बाद जस्सुराम ने घर-घर जाकर लोगों को फिर से चौपाल पर लोगों को इकट्ठा किया। उन्हें अपने विजिट के अनुभवों के बारे में बताया। इसके बाद लोगों के सहयोग से गोपालपुरा में पंचायती राज अधिनियम 1996, धारा 170-1 के तहत 15 सदस्यों की चारागाह विकास समिति का गठन किया गया। समिति में 5 महिला सदस्यों को भी शामिल किया और उस समिति का ग्राम पंचायत गोपालपुरा से अनुमोदन करवाया गया।

अब संस्थान के कार्यकर्ताओं और समिति सदस्यों ने साथ मिलकर गांव के चारागाह का CLM (Common Land Mapping) टूल्स एप्स के जरिये किया। इसमें गांव का कुल चारागाह 328 एकड़ निकला। इसमें से 63 एकड़ चारागाह की जमीन अतिक्रमण मुक्त थी। संस्थान और चारागाह विकास समिति ने मिलकर 50 एकड़ चारागाह भूमि में चौका बनाने का निर्णय एवं प्रस्ताव कर बजट का प्रावधान किया। 28 मई 2022 को चारागाह में चौका बनकर तैयार हो गया। जून 2022 में समिति के लोगों ने अपने ट्रैक्टरों से घास के बीज की बुवाई कर दी। जैसे ही जुलाई में बरसात का दौर आया तो कुछ ही समय बाद वीरान पड़ा चारागाह हरा-भरा दिखने लगा। गांव के पशु दिनभर उस चारागाह मे चराई करने लगे।

संस्थान ने इसके बाद एक बार फिर से चारागाह विकास समिति की बैठक बुलायी। इसमें समिति और गांव वालों ने संस्थान का स्वागत किया। इस बैठक में संस्थान ने बताया कि हमारे पास सीमित बजट होता है। अब आप और हम मिलकर अपनी स्थानीय ग्राम पंचायत से मनरेगा योजना के तहत शेष बचे चारागाह विकास के काम को करवा सकते हैं। सभी समिति सदस्यों ने प्रस्ताव पास कर शेष चारागाह का काम ग्राम पंचायत से कराने का निर्णय लिया।

अब “जस्सुराम बहुत ही खुश था। उसके उजाड़ हो चुके चारागाह को दुबारा विकसित किया गया। इस नेक कार्य में उसने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उसकी छोटी सी पहल ने चारागाह को पुनः जीवित कर दिया। अब जस्सुराम को मजदूरी के लिए इधर-उधर भटकना नही पडे़गा। वह पशुपालन से ही अपने परिवार का भरण-पोषण कर लेगा। अब जस्सुराम तथा अन्य लोग गोपालपुरा में स्वाभिमान से जियेंगे”।

हेमराज डिडवानिया, ग्राम विकास नवयुवक मण्डल, लापोड़िया, संपर्क नंबर 97841 11614
(यह कहानी रणनीतिक संचार केन्द्र, विकास संवाद के सिविक आख्यान पहल के तहत तैयार की गई है। केन्द्र सामाजिक—नागरिक संस्थाओं के रणनीतिक संचार और स्टोरीटेलिंग पर क्षमतावृद्धि कार्यक्रम संचालित कर रहा है।)

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